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16 जुलाई, 2020 का पंचांग : जानिए आज का शुभ-अशुभ समय और राहुकाल

16 जुलाई, 2020 का पंचांग : जानिए आज का शुभ-अशुभ समय और राहुकाल


AAJ KA PANCHANG : HIMACHAL NEWS

प्रतिदिन प्रातःकाल पंचांग पढ़ना शुभ माना जाता है। पंचांग हिन्दू कैलेंडर है जो भारतीय वैदिक ज्योतिष में दर्शाया गया है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अवयवों का गठन होता है, अर्थात् तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण। पंचांग एक निश्चित स्थान और समय के लिये सूर्य, चन्द्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति को दर्शाता है। हिन्दू धर्म में हिन्दी पंचांग के परामर्श के बिना शुभ कार्य जैसे शादी, नागरिक सम्बन्ध, महत्वपूर्ण कार्यक्रम, उद्घाटन समारोह, परीक्षा, साक्षात्कार, नया व्यवसाय या अन्य किसी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। एक शुभ कार्य प्रारम्भ करने से पहले महत्वपूर्ण तिथि का चयन करने में हिन्दू पंचांग मुख्य भूमिका निभाता है। यहां हम दैनिक पंचांग में आपको शुभमुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, सूर्य और चंद्र ग्रह की स्थिति, हिन्दू मास, एवं पक्ष आदि की जानकारी देते हैं।
पंचांग शुभ दिन, तारीख और समय पर शुभ कार्य आरंभ करने और किसी भी तरह के नकारात्मक प्रभाव को नष्ट करने का विचार प्रदान करता है। अगर आप भी आज कोई शुभ काम करने की सोच रहे हैं तो हिमाचल न्यूज़ में आज का पंचांग (Aaj ka Panchang) देखकर आप शुभ-अशुभ समय के बारे में जान सकते हैं।
दैनिक पंचांग  (Daily Panchang) 16 जुलाई, 2020
तिथि  एकादशी  23:47:09
 नक्षत्र  कृत्तिका  18:53:25
 करण :
           बव  11:08:53
           बालव  23:47:09
 पक्ष  कृष्ण 
 योग  गण्ड  24:17:10
 वार  गुरूवार   
 सूर्योदय  05:28:38 
 चन्द्रोदय  26:15:59 
 चन्द्र राशि  वृषभ 
 ऋतु  वर्षा 

 शक सम्वत  1942  शार्वरी
 कलि सम्वत  5122 
 दिन काल  13:57:10 
 विक्रम सम्वत  2077 
 मास अमांत  आषाढ 
 मास पूर्णिमांत  श्रावण  
 शुभ समय   :  अभिजित  11:59:19 - 12:55:08
 अशुभ समय  राहु काल  14:11:52 - 15:56:31
राहुकाल : वैदिक शास्त्रों के अनुसार राहुकाल में शुभ कार्य आरंभ करने से बचना चाहिए। राहुकाल प्रत्येक दिन 90 मिनट का एक निश्चित समय होता है। राहुकाल का समय किसी स्थान के सूर्योदय व वार पर निर्भर करता हैं।
शुभ मुहूर्त : शुभ मुहूर्त किसी भी मांगलिक कार्य को शुरु करने का ऐसा शुभ समय होता है जिसमें तमाम ग्रह और नक्षत्र शुभ परिणाम देने वाले होते हैं। इस समय में कार्यारंभ करने से लक्ष्यों को हासिल करने में सफलता मिलती है और काम में लगने वाली अड़चने दूर होती हैं। आजकल शुभ मुहूर्त को शुभघड़ी भी कहा जाता है।
शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष : चंद्रमा के रोशनी वाले पखवाड़े वाले समय को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। यह अमावस्या से पूर्णिमा तक का समय होता है जब चंद्रमा चमकता है। जबकि वह समय जब चंद्रमा अपने रूप को धूमिल करता है उसे कृष्ण पक्ष कहा जाता है। यह अवधि पूर्णिमा से शुरू होती है और नव चन्द्र दिवस पर समाप्त होती है। इनमें से प्रत्येक अवधि में 15 दिन होते हैं जिन्हें क्रमशः शुक्ल पक्ष तिथि और कृष्ण पक्ष तिथि के रूप में जाना जाता है।
ज्योतिषाचार्य पं. महेंद्र कुमार शर्मा
Posted By : Himachal News  

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